क्रिप्टोकरेंसी इतनी ऊर्जा का उपयोग क्यों करती है?(Bitcoin energy consumption)

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इस लेख में हम आपको बहुत ही सरल तरीके से क्रिप्टोकरेंसी की ऊर्जा (Bitcoin energy) खपत के बारे में बताने जा रहे हैं। 

आप जानते हैं कि हम सभी बिजली का उपयोग करते हैं। Google search, क्लाउड पर सहेजे गए हर एक ईमेल और फ़ोटो के लिए भी बिजली का उपयोग किया जाता है। 

जैसे-जैसे आपका जीवन डिजिटल होता जाता है, आपको उस जीवन को चलाने के लिए अधिक बिजली की आवश्यकता होती है। साथ ही बिटकॉइन एक डिजिटल करेंसी है जो इस समय काफी चर्चा में है। 

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा चल रहे एक अध्ययन के अनुसार, एक मिलियन से अधिक की आबादी वाले नीदरलैंड से भी ज्यादा बिजली की आवश्यकता क्रिप्टोक्यूरेंसी के मशीनों को होती है।

बिटकॉइन को कितनी ऊर्जा की आवश्यकता है? (How Much Energy Does Bitcoin Use?)

गणित की जटिल प्रकृति के कारण सटीक संख्या कहना मुश्किल है। 2017 की शुरुआत में, बिटकॉइन एक वर्ष में 6.6 terawatt-hours बिजली का उपयोग कर रहा था। 

अक्टूबर 2020 में यह 67 terawatt-hours तक था। अब कुछ महीने बाद, यह दोगुना होकर लगभग 121 terawatt-hours हो गया है, कैम्ब्रिज के शोधकर्ताओं ने पाया है कि यह ऊर्जा उनके पूरे विश्वविद्यालय के लिए लगभग 700 वर्षों के लिए पर्याप्त है।

ऐसे गणित से, यदि बिटकॉइन एक देश होता, तो केवल 30 ही ऐसे अन्य देश होते जो बिटकॉइन की तुलना में अधिक बिजली का उपयोग करते। यह युएई, नीदरलैंड, फिलीपींस, बेल्जियम, ऑस्ट्रिया या इज़राइल की वार्षिक बिजली जरूरतों को पीछे छोड़ा है।

आज, विश्व स्तर पर सभी डेटा केंद्र – जो बिग टेक, क्लाउड, इंटरनेट और वर्तमान वित्तीय प्रणालियों को चलाते हैं – उनको प्रति वर्ष लगभग 200 terawatt-hours बिजली की आवश्यकता होती है, “फिलहाल बिटकॉइन नेटवर्क उसके आधी राशि का उपयोग करता है,” ऐसा de Vries ने डीडब्ल्यू को बताया.

तुलनात्मक रूप से, 2018 में एक बिटकॉइन लेनदेन में 80,000 वीजा (Visa) लेनदेन जितनी ऊर्जा की खपत होती है। अब एक बिटकॉइन लेनदेन में उतनी ही ऊर्जा की खपत होती है जितनी कि 453,000 वीजा (Visa) लेनदेन को चलाने में होती है।

बिटकॉइन को ऊर्जा की आवश्यकता क्यों है?(Why Does Bitcoin Use So Much Energy?)

बिटकॉइन एक वर्चुअल क्रिप्टोकरेंसी है। मूल रूप से, इसका मतलब है कि यह एक बड़े पीयर-टू-पीयर कंप्यूटर नेटवर्क द्वारा संचालित है। 

सब कुछ ट्रैक करने और नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए, यह ब्लॉकचेन नामक एक प्रणाली का उपयोग करता है। जो सभी लेनदेन का रिकॉर्ड रखता है और नेटवर्क में सभी को उसकी एक कॉपी मिलती है और हर एक कॉपी एक दूसरे से जुड़ी होती है। सिस्टम के साथ छेड़छाड़ करना असंभव हो जाता है क्योंकि सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है। 

कोई भी इस नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है; उन्हें केवल एक उच्च-शक्ति वाले Purpose-built कंप्यूटर की आवश्यकता होती है, यह जितना अधिक शक्तिशाली होता है, उतना ही बेहतर होता है। 

ये कंप्यूटर, सभी लेन-देन को चालू रखने के लिए तेजी से कठिन गणित की समस्याओं को हल करते हैं और ओवरहीटिंग की समस्या से बचने के लिए मशीन को ठंडा रखना जरुरी है।

जो लोग इन कंप्यूटरों को चलाते हैं, उन्हें अक्सर Miners के रूप में जाना जाता है, वह “प्रूफ ऑफ वर्क” प्रोटोकॉल के तहत ब्रूट फोर्स प्रोसेसिंग पावर का उपयोग करके जटिल समीकरणों को हल करते हैं। 

“प्रूफ ऑफ वर्क” यह सबसे प्रसिद्ध क्रिप्टोकरन्सी का संस्थापक सिद्धांत था, जिसे 2008 में एक अज्ञात व्यक्ति या समूह द्वारा decentralized डिजिटल मुद्रा की तलाश में बनाया गया था।

हर 10 मिनट में जटिल समीकरणों का सफलतापूर्वक समाधान ढूंढ़ने वालो को कुछ बिटकॉइन के रूप में पुरस्कृत करने के लिए इस सिस्टम को डिज़ाइन किया गया है।

उन समीकरणों को हल करने के लिए जिनके पास जितनी अधिक कंप्यूटर शक्ति होगी, उतनी उनके पुरस्कृत होने की संभावना अधिक होगी। जब बिटकॉइन की कीमत बढ़ती है, तो यह अधिक लोगों को प्रौद्योगिकी में निवेश करने के लिए आकर्षित करता है। 

यहीं से ऊर्जा की समस्या उत्पन्न होती है। “प्रूफ-ऑफ-वर्क” (PoW) सिस्टम का उपयोग नए बिटकॉइन को माइन (Mine) करने और नेटवर्क पर लेनदेन स्थापित करने के लिए किया जाता है। 

PoW का मतलब कंप्यूटर “माइनिंग” (Mining) है। यह बिटकॉइन, Mine किए गए बिटकॉइन के हर ब्लॉक में डेटा को साबित करता है (ऐसा करने के लिए कठिन गणितीय समीकरणों को हल करते है)।

आयरलैंड के मेनुथा विश्वविद्यालय के व्याख्याता डेविड मेलोन कहते हैं, “कार्य योजना में समीकरण के समाधान का अनुमान लगाना महत्वपूर्ण है। और इस अनुमान को बनाने में बहुत सारी कंप्यूटर ऊर्जा और बिजली का उपयोग किया जाता है।”

“कीमत जितनी अधिक होगी, उतने अधिक Miners पैसा कमाएंगे और इसलिए नेटवर्क में अधिक मशीनों को जोड़ने के लिए अधिक प्रोत्साहन मिलेगा और जितनी अधिक मशीनें होगी उतनी ही अधिक ऊर्जा का उपयोग होगा।

IEA का अनुमान है कि यदि Miners सबसे अधिक ऊर्जा-कुशल मशीनों का उपयोग करते हैं, तो स्थिति और खराब हो सकती है, जिससे ऊर्जा की खपत बढ़ सकती है।

De Vries ने कहा कि इन मशीनों का उपयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है क्योंकि नेटवर्क भी प्रति सेकंड केवल पांच लेनदेन की प्रक्रिया कर सकता है।

यदि अधिक लोग ऐसा करने का प्रयास करते हैं तो बिटकॉइन अधिक महंगा होगा। लेन-देन शुल्क miners को जाता है, जिसकी वजह से miners की कमाई होती है और अंत में ऊर्जा की खपत भी उतनी ही अधिक होती है।

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