5G अभिशाप या वरदान? (5G Harmful or Not)

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5G यह वायरलेस तकनीक का नवीनतम नेटवर्क है। इसका उपयोग मोबाइल फोन और ब्लूटूथ डिवाइस सहित जहां तेज इंटरनेट की जरूरत होती है ऐसे कई जगहों पर किया जाता है। (5G effect on human being)

5G एक वायरलेस तकनीक है जो इलेक्ट्रोमॅग्नेटिक रेडिएशन नामक ऊर्जा उत्पन्न करके काम करती है। 

यह पिछले वायरलेस नेटवर्क (4G) की तुलना में उच्च आवृत्तियों (frequencies) का उपयोग करता है जिससे इसे तेज और अधिक कुशल के रूप में जाना जाता है।

5G इलेक्ट्रोमॅग्नेटिक फ्रिक्वेन्सी का उपयोग करता है और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (EMF) नामक एक क्षेत्र बनाता है। कुछ लोग सोचते हैं कि EMF का स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

नतीजतन, 5G स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है, इसे लेकर चिंता है। लेकिन आज हम 5G के हमारे स्वास्थ्य पर कौन से हानिकारक प्रभाव होते है या नहीं होते है इस के बारे मेंचर्चा करेंगे।

5G के बारे में अब तक क्या-क्या खोज किया गया हैं, यह जानने के लिए इस लेख को अवश्य पढ़ें।

current 5g status in India

5G क्या है?(What is 5G and how does it work?)

वायरलेस तकनीक लगातार विकसित हो रही है। लगभग हर 10 साल में, मोबाइल कंपनियां वायरलेस सिस्टम की एक नई पीढ़ी लाती हैं। 

प्रत्येक पीढ़ी पिछली पीढ़ी की तुलना में अधिक उन्नत संस्करण (advanced version) है।

2019 में 5G नेटवर्क जारी किया गया। “5G” का अर्थ वायरलेस नेटवर्क की “पांचवीं पीढ़ी” (Fifth generation) है।

5G के कारण सेल्फ-ड्राइविंग कार्स, वर्चुअल रियलिटी उपकरण(VR Device), टेलिमेडिसिन, Remote surveillance, Telesurgery जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और सेवाओं की संख्या में और वृद्धि होने की उम्मीद है। 

5G तेज मोबाइल संचार (mobile communication) प्रदान करता है। 

अगर आप 5G Phones के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, तो आप क्या मुझे अब 5G फोन खरीदना चाहिए या नहीं? इस लेख को देख सकते हैं।

5G तकनीक का स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव पड़ता है या नहीं? (What is the side effect of the 5G in hindi?)

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनायझेशन (WHO) के अनुसार

5G में उपयोग की जाने वाली फ्रिक्वेन्सी पर सीमित खोज है, स्पेक्ट्रम के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड का स्वास्थ्य पर जो प्रभाव होता है उन पर अधिक खोज  किया जा रहा है। 

हालांकि, परिणाम अभी भी सुसंगत नहीं हैं।

आइए देखें कि आज तक के अध्ययन से EMF का मानव शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है:

टिशू हीटिंग (Tissue Heating) 

2017 के एक छोटे से अध्ययन में पाया गया कि मोबाइल फोन 1.8 से 2.2 GHz की आवृत्तियों (frequencies) का उपयोग करते हैं। WHO के अनुसार, फ्रिक्वेन्सी के कारण टिश्यू हीटिंग होता है।

जब आपकी त्वचा विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा (Electromagnetic Energy) को अवशोषित करती है, तो टिश्यू हीटिंग होता है और इससे आपके मस्तिष्क और शरीर के तापमान में मामूली वृद्धि होती है।

2021 के एक अध्ययन में पाया गया कि जैसे-जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे EMF से संबंधित टिश्यू हीटिंग,होने का खतरा बढ़ जाता है। 

इसके अलावा, वृद्ध व्यक्तियों में EMF जितना अधिक होता है, वे उतने ही अधिक टिश्यू को अवशोषित करते हैं क्योंकि उनके त्वचा की मोटाई और रक्त प्रवाह कम होता है।

हालांकि, टिश्यू हीटिंग को अल्पकालिक और न्यूनतम माना जाता है। फेडरल कम्युनिकेशंस कमिशन (एफसीसी) का कहना है कि EMF बेहद कम आवृत्तियों को उजागर करते हैं जो टिश्यू हीटिंग करने के लिए बहुत कम हैं।

5G विशेष रूप से मानव टिश्यू को कैसे प्रभावित करता है यह निर्धारित करने के लिए अधिक खोज करने की आवश्यकता है।

संज्ञानात्मक कार्य (Cognitive function)

5G के एक्सपोजर का संज्ञानात्मक कार्य पर क्या परिणाम होता है इसका अभी तक अध्ययन किया गया नहीं है।

2017 में एक छोटे से अध्ययन में, खोज कर्ताओं ने जांच की है कि संज्ञानात्मक कार्यों के लिए मोबाइल फोन का उपयोग कैसे किया जाता है।

खोज कर्ताओं ने पाया है कि दिन में कम से कम 90 मिनट मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से ध्यान लगाने में दिक्कत (attention difficulties) होती है।

2018 में किए गए खोज में परस्पर विरोधी साक्ष्य मिले हैं। खोज कर्ताओं ने EMF और संज्ञानात्मक कार्य पर 43 अध्ययनों की जांच की। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि EMF और संज्ञानात्मक चिंता के बीच कोई संबंध नहीं था।

कैंसर  (Does 5G cause Cancer?)

2011 में, इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने कहा कि EMF संभवतः मनुष्यों के लिए “Carcinogenic” है। यह वर्गीकरण 14 देशों के 30 वैज्ञानिकों द्वारा निर्धारित किया गया था।

आज तक, अधिकांश खोज कर्ताओं ने EMF और मस्तिष्क कैंसर की संभावना की जांच की है, लेकिन परिणाम असंगत रहे हैं।

उदाहरण के लिए, 2017 के एक खोज अध्ययन में पाया गया कि मोबाइल फोन से EMF radiation यह ग्लिओमा (Glioma) से जुड़ा हुआ है, जो एक प्रकार का मस्तिष्क कैंसर है। 

दूसरी ओर, 2018 के एक अध्ययन में उच्च फ्रीक्वेन्सीवाले EMF और ब्रेन ट्यूमर का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला।

फिरसे, क्या 5G फ्रिक्वेन्सी से कैंसर होता है यह निर्धारित करने के लिए और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।

क्या 5G फ्रीक्वेंसी से उत्सर्जित होने वाले Radiation जानवरों के लिए हानिकारक है? (What is the effect of radiation on birds and animals?)

5G विशेष रूप से जानवरों को कैसे प्रभावित करता है इस पर भी सीमित खोज है।

अधिकांश खोज में चूहे शामिल हैं। उदाहरण के लिए, 2019 के पशु अध्ययन में पाया गया कि मोबाइल फोन से उत्पन्न EMF चूहों के डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं।

एक अन्य 2016 के अध्ययन में पाया गया कि किसी भी फ्रिक्वेन्सी के EMF यह nervous system को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

2020 के खोज ने जांच की है कि EMF घोंघे और मेंढकों को कैसे प्रभावित करता है। खोज कर्ताओं ने कहा कि यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि EMF का जानवरों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है या नहीं।

जानवरों पर 5G का क्या प्रभाव पड़ता है, यह निर्धारित करने के लिए और अधिक खोज  की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में झूठे दावे (Is 5G Harmful to People? True or False?)

5G के जारी होने के बाद से, स्वास्थ्य के बारे में निम्नलिखित कुछ झूठे दावे सोशल मीडिया पर दिखाई दे रहे हैं।

  • कोविड -19 वैक्सीन में 5G माइक्रोचिप होते हैं। 
  • 5G  उपयोग COVID-19 महामारी के लिए किया गया है। 
  • 5G सिरदर्द, माइग्रेन और चक्कर का कारण बनता है

लेकिन इन दावों के पीछे कोई सबूत नहीं है।

5G और नया कोरोना वायरस (5G and Coronavirus relation?)

एक धारणा है कि नया कोरोना वायरस (SARS-CoV-2) 5G मोबाइल नेटवर्क से संबंधित है, जो कोविड-19 की स्थिति को जन्म देता है। लेकिन ये झूठ है।

अफवाहों के अनुसार, 5G को सीधे वायरस प्रसारित करने के लिए कहा जाता है। लेकिन वायरस सांस की बूंदों से फैलता है। वायरलेस नेटवर्क से नहीं।

कुछ अफवाहों का दावा है कि 5G हमारी प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है, जिससे SARS-CoV-2 और Covid-19 का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन यह भी गलत है। 

इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि EMF या 5G आपके वायरल संक्रमण के जोखिम को प्रभावित करते हैं।

क्या 5G पर प्रतिबंध लगाया जाएगा? (Will 5G be banned?)  

किसी भी नई टेक्नोलॉजी के कई फायदे होते हैं और कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। नतीजतन, नई प्रौद्योगिकियां अक्सर टूट जाती हैं या कुछ संस्थानों द्वारा इसका विरोध किया जाता है। 

इस तरह 5G की शुरुआत हुई। इसलिए, कुछ सबूत हैं कि इसका मानव शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए समाज के विभिन्न वर्ग इसे प्रतिबंधित करने का विकल्प सरकार को रही हैं। 

5G तकनीक अभिशाप है या वरदान?

पूरी दुनिया को बदलने का दावा करने वाली इस तकनीक को जानवरों के लिए बड़ा खतरा बताया जा रहा है। 

5G को लेकर यह अहम सवाल तब खड़ा हुआ है जब नीदरलैंड में एक परीक्षण के दौरान अचानक सैकड़ों पक्षियों की जान चली गई। 

हाल ही नीदरलैंड के हेग शहर में सैकड़ों पक्षियों की अचानक मौत की खबर तेजी से फैलने लगी।

एक वेबसाइट के मुताबिक हेग शहर में 5G टेस्ट के दौरान करीब 297 पक्षियों की जान चली गई। 

इनमें से परीक्षण शुरू होने के कुछ ही देर बाद 150 पक्षियों की मौत हो गई, 5G परीक्षण के विकिरण का प्रभाव इतना बुरा था कि आसपास के कई तालाबों में बत्तखों के झुंड में अजीब व्यवहार देखा गया। वह बार-बार अपना सिर पानी में डुबो कर बाहर आ रही थी। 

इससे पहले स्विट्जरलैंड के एक शहर में 5G टेस्ट के दौरान गायों का झुंड जमीन पर गिर गया था। 

कई पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि 5G तकनीक में इस्तेमाल होने वाला इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन जानवरों की त्वचा द्वारा बहुत जल्दी अवशोषित हो जाता है, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। 

इसके दूसरे पक्ष की व्याख्या करते हुए, 5G के कई प्रमोटरों का दावा है कि यह तकनीक डेटा ट्रांसफर को गति देगी और ऊर्जा और वित्तीय लागत को भी कम करेगी, लेकिन इसके लिए उच्चतम रेडियो फ्रीक्वेंसी बैंड के उपयोग की आवश्यकता होगी।

एक ओर जहां रिमोट सेंसिंग जैसी तकनीक तेज होने जा रही हैं, वहीं 5G नेटवर्क कई क्षेत्रों में काफी मदद करेगा। 

ऐसे में बड़े देशों में स्थित साइबर विशेषज्ञ छोटे देशों की अर्थव्यवस्थाओं में आसानी से झांक सकते हैं। 

इससे दुनिया के बाकी हिस्सों की सुरक्षा कम प्रभावी हो सकती है और आतंकवादी कृत्यों का खतरा बढ़ सकता है। 

ऐसा इसलिए है क्योंकि चीन, अमेरिका, उत्तर कोरिया और जापान समेत कई देश 5G नेटवर्क को लेकर काफी चिंतित हैं ताकि भविष्य में इससे बड़ा नुकसान न हो।

5G नेटवर्क एक नई तकनीक है। अभी इसका परीक्षण किया जा रहा है। किसी भी देश में इस तकनीक का पूरी तरह से उपयोग नहीं किया गया है। 

मानव जीवन के साथ-साथ पशु जीवन पर 5G नेटवर्क के प्रभाव का अभी तक व्यापक अध्ययन नहीं किया गया है और मानव जीवन के साथ-साथ पशु जीवन पर इसके नुकसान के बारे में तब तक पता नहीं चलेगा जब तक कि उसका पूरी क्षमता से उपयोग नहीं किया जाता है। 

5G के कई प्रमोटरों का दावा है कि यह तकनीक डेटा ट्रांसफर को गति देगी और मानव जीवन पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा। 

यह तकनीक स्वास्थ्य, ऑटोमोबाइल और सभी प्रकार के उद्योगों में काफी सुधार करेगी और मानव जीवन को आसान बना देगी। 

हम इस बारे में सोचते रहेंगे कि मानव जीवन और पशु जीवन पर विकिरण का न्यूनतम प्रभाव कैसे पड़ेगा और दुनिया कैसे आगे बढ़ेगी। 

इसलिए हमें लगता है कि कोई भी देश 5G नेटवर्क पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाएगा। 

निष्कर्ष

5G नवीनतम वायरलेस नेटवर्क है। यह उच्च इलेक्ट्रोमॅग्नेटिक फ्रीक्वेंसी को उत्पन्न करके तेजी से मोबाइल संचार (mobile communication) प्रदान करता है।

वर्तमान में इस बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि 5G का मानव या पशु स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अधिकांश खोज कर्ताओं ने सामान्य रूप से EMF का अध्ययन किया है और मिश्रित परिणाम पाए हैं।

5G को समझने के लिए अधिक अध्ययन की आवश्यकता है, यह SARS-CoV-2 वायरस से संबंधित नहीं है, जो COVID-19 का कारण बनता है। 

5G तकनीक न तो नया कोरोना वायरस फैलाती है और न ही वायरस को संक्रमित करती है।

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